बचपन याद आता है

मुझे बचपन याद आता है।
सुबह सवेरे उठना और नहाना
मंदिर में जाना और जल चढाना।
पाठशाला का रास्ता,
किताबे और बस्ता।
मेले में गुब्बारे जलेबी पर मचलना,
नहाना नहर में और इमली पर चढ़ना।

खरबूजों का खेत अकसर सताता है।
मुझे बचपन याद आता है।

जुते खेतो में बिचरना,
फिसलकर मेड से गिरना,
भैय्या से झगड़ना, ओर
अपने कुत्ते से लड़ना।
मुझे अब भी हँसाता है।
मुझे बचपन याद आता है।

घड़ी भर का रूठना,
और फिर हस जाना
दादी के साथ ताश की बाज़ी
और मम्मी का मनाना

शहतूत के पेड़ की टहनी
क्रिकेट का बल्ला
गिनती और पहाड़े
स्कूल का हो हल्ला

मासूम सा चेहरा, अभी भी भाता है
मुझे बचपन याद आता है।

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Author: Dilawar

Graduate Student at National Center for Biological Sciences, Bangalore.

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